हिंदी में सबसे अच्छी कहानियां: 5 Best Short Hindi Stories

By Team ABJ

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क्या आप कहानी सुनना पसंद करते हैं? यदि आप एक story lover हैं, तो इस पोस्ट में हम आपके लिए हिंदी में सबसे अच्छी कहानियां (Best Hindi Stories) ले कर आए हैं। आशा करते हैं की आपको यह कहानियां आपको अच्छा लगेगा। जैसे जैसे हम नए नए हिंदी कहानियां आगे ढूंढेंगे, यहाँ हम अपडेट करते जायेंगे। आप यहाँ सभी पढ़ सकते हैं।

Short Hindi Stories – हिंदी में सबसे अच्छी कहानियां


यहाँ 5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियाँ दी गई हैं। और नीचे हम नई कहानियों के लिंक भी साझा करेंगे।

Story 1: आप हाथी नहीं इंसान हैं!

एक आदमी सड़क से गुजर रहा था। उसने सड़क के किनारे बंधे हाथियों को देखा और अचानक रुक गया। उसने देखा कि हाथियों के अगले पैर में एक रस्सी बंधी हुई है। उसे इस बात का बड़ा अचरज हुआ की हाथी जैसे विशालकाय जीव लोहे की जंजीरों की जगह बस एक छोटी सी रस्सी से बंधे हुए हैं! वो जानता था कि हाथी जब चाहते तब अपने बंधन तोड़ कर कहीं भी जा सकते थे। पर किसी वजह से वो ऐसा नहीं कर रहे थे। उसने पास खड़े महावत से पूछा कि भला ये हाथी किस प्रकार इतनी शांति से खड़े हैं, और भागने का प्रयास नही कर रहे हैं?

तब महावत ने कहा, “इन हाथियों को छोटे पर से ही इन रस्सियों से बाँधा जाता है। उस समय इनके पास इतनी शक्ति नहीं होती की इस बंधन को तोड़ सकें। बार-बार प्रयास करने पर भी रस्सी ना तोड़ पाने के कारण उन्हें धीरे-धीरे यकीन होता जाता है कि वो इन रस्सियों को नहीं तोड़ सकते। और बड़े होने पर भी उनका ये यकीन बना रहता है, इसलिए वो कभी इसे तोड़ने का प्रयास ही नहीं करते।

आदमी आश्चर्य में पड़ गया कि ये ताकतवर जानवर सिर्फ इसलिए अपना बंधन नहीं तोड़ सकते क्योंकि वो इस बात में यकीन करते हैं!! इन हाथियों की तरह ही हममें से कितने लोग सिर्फ पहले मिली असफलता के कारण ये मान बैठते हैं कि अब हमसे ये काम हो ही नहीं सकता। और अपनी ही बनायीं हुई मानसिक जंजीरों में जकड़े जकड़े पूरा जीवन गुजार देते हैं।

Story 2: बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया। पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया। उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा। संत ने किसान से कहा तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो और उन्हें शहर के बीचो-बीच जाकर रख दो। किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया। तब संत ने कहा, “अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”। किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे। किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा। तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है। तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते।

Story 3: कण-कण में भगवान

एक तपस्वी अपने उपदेश में शिष्यों से बार-बार कहता था, ‘कण-कण में भगवान हैं। संसार में ऐसी कोई वस्तु और स्थान नहीं है जहां भगवान न हों। प्रत्येक वस्तु को भगवान मानकर उसे नमन करना चाहिए।’ यही उनकी शिक्षा का निचोड़ था।

उनका एक शिष्य कहीं जा रहा था। सामने से एक हाथी तेजी से दौड़ता हुआ आया। महावत लगातार चिल्लाए जा रहा था हट जाओ… हट जाओ.. हाथी पागल हो गया है!’ शिष्य को गुरु का कथन याद आया। वह वहीं खड़ा रहा। यह सोचकर कि मेरी तरह हाथी में भी भगवान का वास है.. भगवान को भगवान से कैसा डर ! वह रास्ते के बीच में ही डटा रहा। यह देखकर महावत क्रोध से चिल्लाया- ‘हट जाओ, क्यों मरने पर तुले हो?’ पर शिष्य अपनी जगह से एक अंगुल भी इधर-उधर नहीं हुआ। पागल हाथी ने उसे सूंड में लपेटा और घुमाकर फेंक दिया। बेचारा घायल शिष्य वहीं पड़ा कराहता रहा, पर उसे अधिक पीड़ा इस बात की थी कि भगवान ने भगवान को मारा! उसके सहपाठी उसे उठाकर आश्रम में ले गए। उसने गुरु से कहा, ‘आप तो कहते हैं कि प्रत्येक वस्तु में भगवान हैं! देखो, हाथी ने मेरी कैसी दुर्गति की है ।’ गुरु ने कहा, ‘यह सत्य है कि प्रत्येक वस्तु में भगवान हैं। निश्चय ही हाथी में भी भगवान का वास है, परंतु महावत में भी तो भगवान हैं। तुम उसकी चेतावनी सुनकर मार्ग से हट क्यों नहीं गए? गुरु की बात सुनकर शिष्य को अपनी भूल का अहसास हुआ।

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शिक्षा – किसी शिक्षा को आधी- अधूरी समझकर उसे प्रयोग में लाना बुद्धिमानी नहीं, मूर्खता है।

Story 4: कपटी बाज

एक बाज एक पेड़ की डाली पर रहता था। उसी पेड़ की खोह में एक लोमड़ी रहती थी।

एक दिन, जब लोमड़ी अपनी खोह से निकली तो बाज उसमें घुस गया और अपने बच्चों को खिलाने के लिए लोमड़ी के बच्चों को उठाकर ले गया जब लोमड़ी लौटी, तो उसने बाज से अनुरोध किया कि उसके बच्चे लौटा दे।

बाज जानता था कि लोमड़ी उसके घोंसले तक नहीं पहुँच पाएगी। उसने लोमड़ी के अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया लोमड़ी पास के एक मंदिर गई और वहाँ से जलती हुई लकड़ी लेकर आई। उसने पेड़ के नीचे आग लगा दी आग की गर्मी और धुएँ से बाज डर गया। अपने बच्चों की जान बचाने के लिए वह जल्दी से लोमड़ी के पास आया और उसके बच्चे लौटा दिए।

निर्दयी व्यक्ति जिनका दमन करता है, उनसे उसे हमेशा खतरा रहता है।

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Story 5: मक्खी का लालच

एक बार एक व्यापारी अपने ग्रहक को शहद बेच रहा था। तभी अचानक व्यापारी के हाथ से फिसलकर शहद का बर्तन गिर गया । बहुत सा शहद भूमि पर बीखर गया । जितना शहद ऊपर-ऊपर से उठाया जा सकता था उतना व्यापारी ने उठा लिया । परन्तु कुछ शहद फिर भी ज़मीन पर गिरा रह गया ।

कुछ ही देर में बहुत सी मक्खियाँ उस ज़मीन पर गिरे हुए शहद पर आकर बैठ गयीं। मीठा – मीठा शहद उन्हे बड़ा अच्छा लगा। वह जल्दी-जल्दी उसे चाटने लगीं। जब तक उनका पेट भर नहीं गया वह शहद चाटती रहीं ।

जब मक्खियों का पेट भर गया और उन्होने उड़ना चाहा, तो वह उड़ ना सकीं। क्योंकि उनके पंख शहद में चिपक गए थे । उड़ने के लिए उन्होने बहुत कोशिश की परन्तु वह फिर भी उड़ ना पायीं। वह जितना छटपटाती उनके पंख उतने चिपकते जाते । उनके सारे शरीर में शहद लगता जाता ।

काफी मक्खियाँ शहद में लोट-पोट होकर मर गायीं। बहुत सी मक्खियाँ पंख चिपकने से छट पटा रहीं थीं । परन्तु तब भी नई मक्खियाँ शहद के लालच में वहाँ आती रहीं। मरी और छट पटाती मक्खियों को देखकर भी वह शहद खाने का लालच नहीं छोड़ पाई ।

मक्खियों की दुर्गति और मूर्खता देखकर व्यापारी बोला- जो लोग जीभ के स्वाद के लालच में पड़ जाते है, वह इन मक्खियों के समान ही मूर्ख होते हैं। स्वाद के थोड़ी देर के सुख उठाने के लालच में वह अपनें स्वास्थ को नष्ट कर देते हैं। रोगी बनकर तड़पते है और जल्द ही मर जाते हैं।

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